मैं अपने भाई की पत्नी की बहन की शादी के लिए उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव पहुँचा था। वहाँ का माहौल बिल्कुल देसी था, हवा में मिट्टी की खुशबू और दूर-दूर तक खेतों की हरियाली।
शादी के घर में हलचल मची हुई थी, रिश्तेदार इकट्ठा हो रहे थे। मेरी भाभी के चाचा-चाची भी आए थे उनके साथ उनकी दो बेटियाँ, रानी और मीना, जो बिल्कुल स्वर्ग की अप्सराओं जैसी लग रही थीं।
रानी बड़ी थी, शायद 19 साल की, उसकी आँखें काली और चेहरे पर एक शरारती मुस्कान हमेशा खेली रहती। मीना छोटी, 18 साल की, थोड़ी शर्मीली लेकिन उसकी मुस्कान में एक मासूमियत थी जो दिल को छू जाती। दोनों को देखते ही मेरे मन में चींटियाँ रेंगने लगीं, मेरा लंड तुरंत हरकत में आ गया।
मैं सोचने लगा कि काश कोई जादू हो जाए और मैं इन दोनों को चोद सकूँ। ये ख्याल सपने जैसा था, लेकिन गाँव की वो रातें ऐसी होती हैं जहाँ सपने सच हो सकते हैं।
वहाँ मुझे देसी विलेज चूत का असली मजा मिला, जो आज भी मेरी यादों में ताजा है। मैं वहाँ पहुँचते ही दोनों को निहारने लगा, रानी की कमर कितनी पतली और छाती कितनी उभरी हुई, मीना की गांड गोल और मोटी, बस देखते ही मेरा लंड सख्त होने लगा।
मैंने सोचा, अगर ये मौका मिला तो मैं इनकी चुदाई करके अपना मन बहलाऊँगा। शादी का उत्साह तो था ही, लेकिन मेरे मन में ये दोनो का ख्याल घूम रहा था। चाची-चाचा से बातें करते हुए भी मेरी नजरें उन पर टिकी रहतीं।
रानी ने एक बार मुझे देखकर मुस्कुराया, जैसे वो मेरे मन की बात समझ गई हो। मीना शर्माते हुए नजरें फेर लेती। गाँव का वो वातावरण, शाम की ठंडक, सब कुछ रोमांटिक लग रहा था।
मैं कल्पना करने लगा कि इनके साथ बिताई रात कैसी होगी, उनकी चूत कितनी नरम होगी, चोदते समय उनकी आहें कितनी मधुर होंगी। ये सब सोचकर मेरा दिल धड़कने लगा, और मैंने फैसला कर लिया कि मौका मिले तो इन्हें चुदवाने का प्रयास जरूर करूँगा।
शादी का एक दिन बाकी था, तो पूरा घर सजावट और कामों में मशगूल हो गया था। सब लोग अपने-अपने काम में लगे थे, कोई मंडप बाँध रहा था, कोई सामान मँगवा रहा था, कोई खाने की तैयारी कर रहा था।
मैं भी सारा दिन मेहनत करता रहा, माल लाता-लाया, लोगों की मदद करता रहा। शाम ढलते-ढलते मैं थककर चूर हो गया। नहा-धोकर मैं छत पर बने एक छोटे से कमरे में चला गया।
वहाँ एक पुराना पंखा लगा था, जो धीरे-धीरे घूम रहा था। मैं बिस्तर पर लेट गया, मोबाइल निकालकर स्क्रॉल करने लगा। गर्मी अभी भी थी, पसीना आ रहा था, खासकर नीचे। मेरा लंड पसीने से भीगा हुआ था, इसलिए मैंने हाथ डालकर उसे पोंछा।
कमरे में कोई नहीं था, घर के बाकी लोग नीचे सो रहे थे, तो मैं बिंदास हो गया। मैंने पजामा नीचे सरका लिया और अपने लौड़े को हाथ में पकड़ लिया। धीरे-धीरे हिलाने लगा, मजा लेने लगा।
वो पल अकेलेपन में इतना सुकून दे रहा था। गर्मी की वजह से मेरा शरीर गर्म था, लेकिन ये काम मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मैं आँखें बंद करके कल्पना करने लगा, रानी और मीना के चेहरे सामने आ गए।
उनकी स्माइल, उनकी बॉडी, सब कुछ। मैंने सोचा, काश ये दोनों यहाँ होतीं, मैं इन्हें चोदते हुए कितना आनंद लेता। गाँव की शांति में ये ख्याल और रोमांचक लग रहे थे।
मैंने स्पीड बढ़ा दी, लंड अब पूरी तरह खड़ा हो गया था। मेरी साँसें तेज हो गईं, मन में वही दो अप्सराएँ घूम रही थीं। थकान भूलकर मैं खो गया उस पल में, लेकिन अचानक एक आवाज आई, जैसे कोई दरवाजा खटखटा रहा हो।
मैंने जल्दी से पजामा ठीक किया, लेकिन लंड अभी भी खड़ा था, पूरी तरह शांत नहीं हुआ। मैं सोने का नाटक करने लगा, आँखें बंद करके लेटा रहा।
रात बहुत गहरी हो चुकी थी, शादी का घर होने से नीचे हल्की-फुल्की आवाजें आ रही थीं, लेकिन ऊपर छत पर सन्नाटा था। मीना, छोटी वाली, कुछ देर बाद कमरे में आ गई।
वो शायद पानी लेने या कुछ लेने आई हो। कमरे में सिर्फ मैं अकेला था। ‘भैया, आप सो गए क्या?’ उसने धीमी आवाज में पूछा, मुझे देखकर। मैंने कोई जवाब नहीं दिया, नाटक जारी रखा।
उसने लाइट जला दी, कमरे में पीली रोशनी फैल गई। तभी उसकी नजर मेरे पजामे पर पड़ी, जहाँ लंड की उभार साफ दिख रही थी। वो हैरान होकर घूरने लगी, उसके चेहरे पर लाली छा गई।
लौड़ा पहाड़ी की तरह खड़ा था, पजामा में भी उसकी शक्ल साफ थी। मैं कनखियों से उसे देख रहा था, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। क्या होगा अब? वो शर्मा जाएगी या कुछ कहेगी?
उसने कुछ सेकंड तक देखा, फिर लाइट बंद कर दी। मैं सोचने लगा, शायद वो चली जाएगी। लेकिन वो बाहर गई और कुछ देर बाद वापस लौटी, इस बार रानी को साथ लेकर।
मैं हैरान था, क्या ये सपना है? रानी की गांड बहुत बड़ी और आकर्षक थी, उसकी चूचियाँ सुंदर और उभरी हुईं। मीना ने उसे कमरे में लाकर खड़ा किया, मैं सोते हुए नजरें उठाकर देखने लगा।
मेरा मन उछल रहा था, आज रात कुछ तो होगा। रानी ने मोबाइल की लाइट जलाई, सीधे मेरे खड़े लंड पर फोकस किया। उसकी आँखें चमक उठीं, जैसे वो कुछ ढूँढ रही हो।
मैं उसे अपनी कनखियों से देख रहा था, लेकिन अब और बर्दाश्त नहीं हुआ। रानी ने मोबाइल से मेरे लंड की फोटो लेने की कोशिश की, मिनटों में ही वो क्लिक करने लगी। मैं तुरंत उठ बैठा और चिल्लाया, ‘ये क्या कर रही हो? फोटो डिलीट करो तुरंत!’ वो हँसते हुए भागने लगी, फोन हाथ में लिए।
मैंने उसे पकड़ने के लिए दौड़ लगाई, कमरे में जगह कम थी, तो वो दीवार से टकराई। मैंने उसे गोद में उठा लिया, कसकर पकड़ लिया और बिस्तर पर पटक दिया।
उसके ऊपर चढ़ गया, मेरा चेहरा उसके होंठों के पास था। हमारी साँसें मिल रही थीं, कमरे में गर्मी बढ़ गई। ‘फोन दो!’ मैंने कहा। ‘नहीं दूंगी,’ वो हँसते हुए बोली, लेकिन उसकी आँखों में शरारत थी।
मैंने उसके होंठ चूम लिए, काटने लगा। वो ऊऊँ करने लगी, उसकी गर्म साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। मेरा लंड अब पूरी तरह टाइट हो गया, उसके शरीर से सटकर।
मैंने हाथ नीचे सरकाया, उसके लोवर में डाल दिया, चूत पर उंगली फेरी। वो चिहुँक उठी, एक मादक आह निकली उसके मुँह से। मीना अभी भी कमरे में खड़ी थी, वो सब देख रही थी, उसके चेहरे पर शर्म और उत्तेजना दोनों थे।
रानी अब मेरे कब्जे में थी, मैंने उसके कपड़े खींचने शुरू कर दिए। उसकी चूचियाँ बाहर आ गईं, नरम और गर्म। मैंने उन्हें दबाया, चूसा। वो कराहने लगी, ‘आह… भैया…’ मीना की साँसें तेज हो गईं, वो कुंवारी थी लेकिन ये दृश्य देखकर गर्म हो रही थी। मैंने सोचा, आज दोनों को चोदूँगा।
मैं रानी के फोन को एक तरफ फेंक दिया, अब ध्यान सिर्फ उसके शरीर पर था। वो हँसते हुए भागने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैंने उसे मजबूती से पकड़ रखा था।
बिस्तर पर लेटाकर उसके ऊपर झुका, होंठों को चूमा, जीभ डाली। उसकी सलाइवा मीठी लगी। मेरा हाथ उसकी चूत पर पहुँच गया, उंगली अंदर डाल दी। वो तड़प उठी, लेकिन मजा लेने लगी। ‘आह… हाँ…’ वो बोली।
मैंने उंगली अंदर-बाहर करने लगी, उसकी चूत गीली हो गई। मीना अब पास आ गई, वो देख रही थी, हाथ अपनी चूचियों पर रखे। रानी ने उसे बुलाया, ‘मीना, आ ना…’ मीना शर्मा रही थी, लेकिन आई।
मैंने रानी को पूरी तरह नंगा कर दिया, उसकी गांड थपथपाई। मेरा लंड बाहर था अब, खड़ा और तैयार। मैंने उसे चोदना शुरू किया, लंड अंदर डाला। वो चिल्लाई, लेकिन आनंद में।
चोदते हुए मैं तेजी से हिल रहा था, कमरा आहों से गूँज रहा था। मीना देख रही थी, उसकी चूत गीली हो गई। रानी खुली खेल रही थी, जैसे वो चुदक्कड़ हो। मैंने उसे चोदते-चोदते मीना को भी खींच लिया। मीना कुंवारी थी, लेकिन उत्तेजित होकर चुदवाने को तैयार हो गई।
मैंने पहले रानी को संभाला, चुदाई जारी रखी। उसकी चूत टाइट थी, मजा आ रहा था। मैं रानी की चूत में उंगली डालने लगा, लेकिन अब लंड डाल दिया। उसका पूरा शरीर ढीला पड़ गया, वो मेरे नीचे तड़प रही थी।
चोदते हुए मैंने उसके स्तनों को चूसा, गांड थपथपाई। मीना अब बगल में लेटी थी, मैंने उसे भी छुआ। रानी चुदाई में खो गई, ‘और जोर से चोदो…’ वो बोली।
मैंने स्पीड बढ़ाई, कमरा गंध से भर गया। फिर मैंने मीना को नंगा किया, उसकी कुंवारी चूत को सहलाया। वो डर रही थी लेकिन गर्म थी।
मैंने रानी से कहा, मीना को तैयार करो। रानी ने मीना की चूत चाटी, मीना आहें भरने लगी। फिर मैंने मीना में लंड डाला, धीरे-धीरे। वो दर्द में चिल्लाई लेकिन फिर मजा लेने लगी।
अब दोनों को बारी-बारी चोद रहा था, एक चुदाई का मजा दूना हो गया। रानी अनुभवी थी, मीना नई लेकिन जल्दी सीख गई। हम तीनों पसीने में लथपथ, रात भर चुदाई चली।
सुबह होने से पहले हम थक गए, लेकिन वो रात हमेशा याद रहेगी। गाँव की वो चुदाई, दो बहनों के साथ, सपने से भी ज्यादा रोमांटिक थी।
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