दोस्त की बहन का चुदाई का सच

Dilshad Ahmad


ये मेरी ज़िंदगी की सबसे सच्ची और हॉट घटना है, जो एक आम सी दोस्ती से शुरू हुई और एक ऐसे मोड़ पर जा पहुँची जिसकी कल्पना भी नहीं की थी।  बॉस की वाइफ से जुड़ी कोई बात नहीं, ये तो मेरे दोस्त राजीव की बहन अनीता की कहानी है।  

राजीव और मैं अर्जुन बचपन से साथ थे।  हम दिल्ली के पटेल नगर इलाके में एक ही मोहल्ले में पले-बढ़े।  राजीव की बहन अनीता को मैं तब से जानता हूँ जब वो स्कूल ड्रेस में साइकिल चलाती थी, पर कभी उसे उस नज़र से नहीं देखा था।  

वो मेरे लिए बस राजीव की छोटी बहन थी, एक किताबी कीड़ा जो हमेशा अपनी पढ़ाई में डूबी रहती।  मुझे याद है, हम स्कूल से लौटते तो अनीता अपने कमरे में बंद किसी परीक्षा की तैयारी कर रही होती।  उम्र में वो हमसे दो साल ही बड़ी थी, 24 साल की, और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम. कॉम.  कर रही थी।  

राजीव और मैं 22 के थे और अभी-अभी बी. टेक.  ख़त्म करके नौकरी ढूँढ रहे थे। अनीता को देखकर कभी कोई कुँवारी लड़की वाली भावना नहीं जगी थी।  वो सांवली, लंबी और दुबली-पतली थी।  पर हाँ, उसकी आँखों में एक गहराई थी और उसकी हंसी बहुत खनकदार थी।  

उस दिन बरसात का मौसम था।  जुलाई का महीना, और दिल्ली की सड़कों पर पानी भरा हुआ था।  राजीव ने मुझे फोन किया,अर्जुन आज तो आ ही जा यार।  मम्मी ने गरमा-गरम पकौड़े बनाए हैं, और अनीता भी आज घर पर ही है।  

साथ में बैठकर खाएँगे। | मुझे याद है, उस दिन मेरे पास करने को कुछ ख़ास नहीं था।  कुछ इंटरव्यू कॉल्स थीं जो मैं अटेंड कर चुका था, और शाम का वक़्त खाली था।  मैंने हाँ कह दिया।  मेरी स्प्लेंडर बाइक स्टार्ट की और बारिश की हल्की बूंदाबांदी के बीच मैं पटेल नगर से उनके विकासपुरी वाले घर पहुँच गया।  

घर पुराने ज़माने का सरकारी क्वार्टर टाइप था, जिसमें एक बड़ा सा आँगन और पीछे एक छोटी सी बगिया थी। दरवाज़ा अनीता ने खोला।  मैंने देखा, उसने सफ़ेद रंग की एक पतली सी कुर्ती पहनी हुई थी और उसके साथ लाल रंग की लैगिंग्स।  

बाल गीले थे, शायद अभी-अभी नहाई थी।  उसकी बिना मेकअप की चमड़ी पर बारिश की नमी की हल्की चमक थी।  आइए अर्जुन जी उसने कहा और हल्की सी मुस्कान दी।  राजीव तो अभी मार्केट गया है, आधे घंटे में आएगा।  आप आइए, बैठिए। | 

मैंने सोचा, चलो अकेले में अनीता के साथ बैठने का मौका मिला है।  आज तक हमने कभी आमने-सामने देर तक बात नहीं की थी।  मैंने अपनी चप्पलें बाहर उतारीं और अंदर ड्राइंग रूम में एक पुराने सोफ़े पर जा बैठा।  दीवारों पर उसके पिता जी की कुछ पुरानी आर्मी की तस्वीरें लगी थीं, और टी. वी.  के पास एक छोटी सी किताबों की अलमारी थी।  

वातावरण में एक सुस्ताहट और शांति थी, बाहर हल्की बूंदाबांदी की आवाज़ें आ रही थीं। अनीता रसोई से पानी का गिलास ले आई और मेरे सामने रखकर सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।  उसके बैठने के अंदाज़ में एक बेफ़िक्री थी, एक पैर को मोड़कर सीट पर रख लिया था।  

उसकी लैगिंग्स उसकी लंबी टांगों पर कसी हुई थीं और मैंने अपनी आँखों को ज़ोर देकर दूसरी तरफ़ घुमाया।  वो बातें करने लगी, आपकी नौकरी का क्या सीन है?  मैंने अपने कुछ इंटरव्यू के अनुभव बताए और वो अपनी पढ़ाई के बारे में बताने लगी।  

वो एक इंटर्नशिप की तैयारी कर रही थी और बहुत उत्साहित थी।  बातों ही बातों में पता चला कि वो स्टॉक मार्केट और फाइनेंस में गहरी दिलचस्पी रखती थी।  मुझे ये जानकर हैरानी हुई क्योंकि राजीव को तो गणित से चिढ़ थी।  

मैं खुद इंजीनियरिंग का छात्र होते हुए भी शेयर बाज़ार पर नज़र रखता था, और बस यहीं से हमारी बातचीत का ग्राफ ऊपर चढ़ने लगा।
 
हम IPOs, म्यूचुअल फंड्स और क्रिप्टोकरेंसी पर बात करने लगे।  वो बहुत बिंदास होकर अपनी राय रख रही थी और मैं चकित होकर सुन रहा था।  उसकी बुद्धिमानी मुझे आकर्षित कर रही थी, और मैं खुद को उसकी तरफ़ खिंचता हुआ महसूस कर रहा था।  

वो उठकर चाय बनाने चली गई और मैं फ़ोन देखने लगा।  थोड़ी देर में वो दो कप अदरक वाली चाय लेकर आई।  चाय पीते-पीते हमारी बातों का दायरा फैलता गया।  उसने मुझसे पूछा, आपको तो राजीव के साथ कॉलेज में बहुत मज़े आए होंगे?  

गर्लफ्रेंड वगैरह बनी किसी की? | मैं हँसा और बोला, अरे नहीं, हम तो बस ठेठ देसी हैं, कोई गोरी-चिट्टी नहीं फंसी। | वो भी हँसने लगी, उसकी हँसी कमरे में गूँज गई।  उसने बताया कि उसका भी एक रिलेशनशिप टूट चुका है और अब वो अपने करियर पर फोकस कर रही है।  

इस बीच, उसके बाल लगभग सूख गए थे और उसकी खुशबू पूरे कमरे में फैल रही थी – शैंपू और गीली मिट्टी की मिली-जुली सौंधी महक।
 
एकाएक बारिश तेज़ हो गई।  पानी की तेज़ धारें छत पर गिरने की आवाज़ ने हमारी बातचीत में एक धीमा संगीत भर दिया।  बाहर अँधेरा होने लगा था।  मैंने राजीव के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो बारिश की वजह से कहीं किसी शेड में खड़ा होगा और देर से आएगा।  

अब हमारे बीच की दूरी कम हो गई थी।  मैं सोफ़े पर से आगे झुक गया था और वो भी अपनी कुर्सी पर सिमटकर बैठी थी।  उसका पैर अब फर्श पर था और उसके पैर की अँगुलियाँ मेरी नज़रों के ठीक सामने थीं – लाल नेल पॉलिश लगी हुई।  

मेरे अंदर कुछ हलचल होने लगी।  ये अजीब था, जिस लड़की को मैंने बचपन से बहन की तरह देखा था, अब उसके साथ अकेले में बैठकर मेरे शरीर में एक अलग ही गर्मी दौड़ रही थी।
 
मैंने कहा, बारिश बहुत तेज़ है, छत पर जाकर देखें? | वो मान गई।  हम सीढ़ियाँ चढ़कर छत पर पहुँचे।  छत पर एक तरफ़ बड़ा सा शेड था जहाँ कपड़े सूखते थे।  हम शेड के नीचे खड़े होकर बारिश का नज़ारा देखने लगे।  पानी की बौछारें हमारे चेहरों पर हल्की-हल्की फुहारें उड़ा रही थीं।  

अनीता ने अपनी बाँहें फैला दीं, जैसे बारिश को गले लगाना चाहती हो।  मैंने उसे देखा – उसकी कमर की लचक, गीली लटें जो गालों पर चिपक रही थीं, और वो बिंदास मुस्कान।  मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
 
क्या देख रहे हैं?  उसने शरारत से पूछा। तुम्हें, मेरे मुँह से निकल गया। वो कुछ देर चुप रही, फिर बोली, राजीव को पता चल गया तो जान से मार देगा। | ये सुनकर मुझे हँसी आ गई, पर हम दोनों के बीच का तनाव कम नहीं हुआ।  

मैंने हिम्मत करके उसकी तरफ़ एक कदम बढ़ाया।  उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था और बारिश के पानी से उसकी सफ़ेद कुर्ती उसके शरीर से चिपक गई थी।  

उसके स्तनों का उभार साफ़ नज़र आने लगा था और मैं अपनी नज़रें वहाँ से नहीं हटा पा रहा था। अनीता, मैंने धीमे से कहा, हो सकता है ये गलत हो, पर मैं… उसने अपनी उँगली मेरे होठों पर रखकर मुझे चुप करा दिया।  कुछ मत बोलो,

वो फुसफुसाई।  उसकी उँगली का स्पर्श बिजली के झटके जैसा था।  मैंने उसकी वो उँगली अपने मुँह में ले ली और हल्के से चूसने लगा।  वो चौंकी, पर हटी नहीं।  उसका शरीर काँप उठा और उसके मुँह से एक हल्की सी सिसकी निकली, |उह्ह्ह्ह्ह…| 

ये सब एक सपने की तरह हो रहा था।  हम छत पर थे, बारिश की तेज़ आवाज़ें हमारी आवाज़ों को दबा रही थीं, और हमारे बीच की सदियों पुरानी दोस्ताना दीवार पल भर में ढह रही थी।
 
मैंने धीरे-धीरे उसकी कलाई पकड़ी और अपनी तरफ़ खींचा।  वो बिना किसी विरोध के मेरी बाहों में आ गई। उसके शरीर की गर्मी और बारिश की ठंडक का अद्भुत मिलन था।  मैंने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखा।  

उसकी आँखें बंद थीं और होंठ हल्के से खुले हुए थे, मानो मुझे बुला रहे हों।  मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।  ये चुंबन कच्चा था, धीमा था, पर उसमें एक भूख थी जो सालों से दबी हुई थी।  हमारे होंठ आपस में लड़खड़ा रहे थे, एक-दूसरे को चूस रहे थे।  

उसके होंठ नर्म और गर्म थे, और उनमें चाय की मिठास घुली हुई थी। उसके हाथ मेरी कमर के चारों ओर लिपट गए और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया।  मैंने अपनी ज़ुबान उसके मुँह के अंदर डाली और वो मेरी ज़ुबान को अपने होंठों से पकड़ कर चूसने लगी।  

हमारी साँसें तेज़ हो गईं।  मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरा उसकी पीठ पर फिराने लगा।  उसने मेरे बालों में उँगलियाँ फेर दीं और हल्के से खींचा।  हम पागलों की तरह एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
 
अचानक उसने अपने होंठ हटाए और ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने लगी।  अर्जुन, यहाँ नीचे चलते हैं।  नीचे मेरे कमरे में कोई नहीं आएगा। | वो बोली।  उसकी आवाज़ काँप रही थी और उसमें एक हुक्म था, एक चाहत थी।  मैंने सिर हिलाया और हम तेज़ी से सीढ़ियाँ उतरकर अंदर आए।  

मेरा लौड़ा अब तक पूरी तरह खड़ा होकर मेरी जींस में तन चुका था।  चलने में भी तकलीफ़ हो रही थी।  अनीता का कमरा सबसे आखिरी कोने में था, हल्के नीले रंग का, जिसमें एक बड़ी सी खिड़की थी।  उसने दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी।
 
कमरा सादा पर सुंदर था।  एक सिंगल बेड, एक स्टडी टेबल और एक बड़ी सी किताबों की अलमारी।  खिड़की के पास पर्दे बारिश से भीग रहे थे क्योंकि शायद वो खुली रह गई थी।  उसने खिड़की बंद की और मेरी तरफ़ मुड़ी।  अब हम पूरी तरह से अकेले थे।
 
जो हुआ वो बहुत अच्छा था, उसने कहा और मेरे करीब आई।  पर मैं तुम्हें चाहती हूँ, अर्जुन। ये सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं भी तुम्हें चाहता हूँ, अनीता।  आज नहीं, शायद पिछले कुछ हफ़्तों से तुम मेरे दिमाग में घूम रही हो।  ये सच था, हालाँकि मुझे आज ही इसका एहसास हुआ था।
 
वो मेरे पास आई और उसने मेरी टी-शर्ट के नीचे से अपने हाथ डाल दिए।  उसके ठंडे हाथ मेरी गर्म छाती को छूने लगे।  मैंने उसकी कुर्ती का गला पकड़ा और उसे नीचे की तरफ़ खींचने लगा।  वो मुस्कुराई और उसने अपने हाथ ऊपर उठा दिए, जिससे मैं उसकी कुर्ती उतार सका।  

कुर्ती उतरते ही उसके स्तन एक काली ब्रा में कस कर बंधे दिखे।  वो बहुत सुंदर लग रही थी – सांवली चमड़ी, नर्म उभार और वो मदहोश कर देने वाली खुशबू।
 
मैंने उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोला।  ब्रा उतारते ही उसके स्तन बाहर निकल आए।  वो गोल-मटोल थे, बिल्कुल सही आकार के, और उनके सिरे गहरे भूरे रंग के थे और पहले से ही खड़े हुए थे।  मैंने अपना मुँह उसके एक स्तन पर लगा दिया और उसे चूसने लगा।  आआह्ह्ह्ह… अर्जुन… वो कराह उठी।  

उसने अपना हाथ मेरे सिर के पीछे रखा और मुझे दबाने लगी, जैसे और गहराई से चूसने के लिए कह रही हो।  मेरी ज़ुबान उसके निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थी, और मैं बीच-बीच में उसे हल्के से दाँत से भी काट लेता था।  

उसके मुँह से लगातार कराहटें निकल रही थीं। फिर मैंने उसकी लैगिंग्स उतारनी शुरू की।  उसने खुद अपनी कमर उठाकर मेरी मदद की।  लैगिंग्स उतरते ही सामने थी एक काली पैंटी, जो उसकी जाँघों पर बिल्कुल फिट बैठ रही थी।  

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी पैंटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाने लगा।  जैसे-जैसे पैंटी उतर रही थी, उसकी चुत का तिकोन नुमा हिस्सा नज़र आने लगा।  उसके बाल हल्के से और सलीके से संवारे हुए थे।  जब मैंने पैंटी पूरी उतारी तो वो मेरे सामने पूरी तरह से नंगी लेटी थी।
 
तुम कितनी खूबसूरत हो, मैंने फुसफुसाते हुए कहा। अब तुम भी कपड़े उतारो, उसने शर्माते हुए कहा। मैंने तेज़ी से अपनी टी-शर्ट और जींस उतार फेंकी।  मेरा लण्ड अब पूरी तरह से तन चुका था और वो मेरे अंडरवियर में से बाहर निकलने को बेकरार था।  

मैंने अपना अंडरवियर भी उतारा और अनीता की आँखें मेरे लंड पर टिक गईं।  उसके होंठों पर एक शरारत भरी मुस्कान आ गई।

ये तो बहुत बड़ा है, उसने कहा। मैं उसके ऊपर झुक गया और हम फिर से चुंबन करने लगे।  इस बार हमारे शरीर पूरी तरह से एक-दूसरे से सटे हुए थे।  मेरा लंड उसकी जाँघों के बीच फंसा हुआ था और वो अपनी कमर हिला-हिलाकर उसे रगड़ रही थी।  

उसकी चुत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, और मुझे उसकी गर्मी और चिकनाहट अपने लंड पर साफ़ महसूस हो रही थी।
 
मेरा मुँह धीरे-धीरे नीचे सरकता हुआ उसके पेट, नाभि और फिर उसकी चुत तक पहुँच गया।  मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और अपना सिर उनके बीच रख लिया।  उसकी चुत की महक बहुत ही मादक थी।  मैंने अपनी ज़ुबान निकाली और उसकी चुत के ऊपरी हिस्से पर धीरे से सहलाना शुरू किया। आआअह्ह्ह्ह्हह… अर्जुन… ये क्या कर रहे हो…

उसने कराहते हुए कहा।  मैंने उसकी चुत को पूरी तरह से चाटना शुरू कर दिया।  मेरी ज़ुबान उसकी चुत के हर कोने में जा रही थी।  मैं बीच-बीच में उसकी चूत के बाहरी होंठों को चूसता और फिर अंदर की तरफ़ गहराई तक ज़ुबान डालता।  

मैंने पाया कि अनीता को ये बेहद पसंद आ रहा था।  वो अपनी कमर को झटके दे रही थी और मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर दबा रही थी।

अब रुको, मेरी बारी,| उसने अचानक कहा और मुझे धक्का देकर पीछे कर दिया।  उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और वो मेरे ऊपर झुक गई।  मुझे समझते देर न लगी कि वो क्या चाहती है।  मेरा लंड उसके चेहरे के ठीक सामने था।  

उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और एक पल को उसे निहारती रही।  इसे मैंने कई बार सोचा है, उसने फुसफुसाया, कि मेरे मुँह में एक अच्छा सा लंड कैसा लगेगा।

ये सुनकर मुझे यकीन नहीं हुआ।  दोस्त की बहन अनीता निकली लंड चूसने की शौक़ीन, ये ख्याल दिमाग में आते ही मेरा लंड और भी ज़ोर से फड़कने लगा।  

उसने अपने होंठ खोले और मेरे लंड के सुपारे को अपने मुँह में ले लिया।  उसके होंठ गर्म और नर्म थे।  उसने बस सिरा अपने मुँह में रखा और हल्के-हल्के चूसने लगी।  उसकी आँखें बंद थीं और उसके चेहरे पर एक गहरी एकाग्रता थी।  उह्ह्ह्ह्ह… अनीता…

मेरे मुँह से निकला।  उसने अपनी ज़ुबान से मेरे लंड के सिरे के नीचे वाली नस को सहलाना शुरू किया।  हर स्पर्श से मेरे शरीर में करंट सा दौड़ जाता था।

धीरे-धीरे उसने और गहराई तक लेना शुरू किया।  वो मेरे लंड को मुँह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी।  उसकी लार मेरे पूरे लंड पर फैल गई थी और वो चमकने लगा था।  उसने एक हाथ से मेरे गोटों को भी सहलाना शुरू कर दिया।  

वो बीच-बीच में मेरे लंड को पूरा बाहर निकालती, होंठों पर मारती, और फिर से एक झटके में अंदर ले लेती।  आआह्ह्ह्ह… तुम तो बहुत अच्छा चूसती हो… मैंने कहा।
 
उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखों में एक शरारत थी।  मुझे लण्ड चूसना बहुत पसंद है, अर्जुन।  मैं एक पक्की चुदक्कड़ हूँ, उसने कहा और फिर से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया।  इस बार उसने अपना सिर तेज़ी से हिलाना शुरू किया।  

मेरे लंड का पिछला हिस्सा उसके गले को छू रहा था और वो ‘गक-गक’ की आवाज़ें आने लगी थीं।  मैं लगभग उत्तेजना के चरम पर पहुँच रहा था।  मैंने उसे रोकने की कोशिश की, अनीता, मैं निकल जाऊँगा…
 
पर उसने अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली और चूसने की रफ़्तार और तेज़ कर दी।  उसके हाथ मेरी जाँघों पर ज़ोर से दबा रहे थे।  मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया।  मैंने ज़ोर से कराहते हुए अपना सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया।  आआआअह्ह्ह्ह्हह… मैं चीख उठा।  

अनीता ने मेरा सब कुछ पी लिया, एक बूँद भी बाहर नहीं गिरने दी।  उसने मेरे लंड को आखिरी बूँद तक चूसा, फिर उसे बाहर निकालकर अपने होंठ पोंछे।
 
ये तो बस शुरुआत है, उसने मुस्कुराते हुए कहा।  मैं हैरान था।  उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी।  अब तुम मुझे चोदो, अर्जुन।  मेरी चुत बहुत देर से तुम्हारे लंड का इंतज़ार कर रही है। |
 
ये सुनते ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा।  उसे चूसते देख और उसके मुँह से ये बातें सुनकर मैं पूरी तरह से पागल हो चुका था।  मैंने उसे पलटकर बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया।  मैंने अपने घुटनों से उसकी टाँगें और फैलाईं।  

उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चुत के द्वार पर लगा लिया।  वो पूरी तरह से भीगी हुई थी, फिर भी मैंने पहले अपने लंड के सिरे को उसकी चुत के बाहरी होंठों पर रगड़ा ताकि वो अच्छी तरह से चिकनी हो जाए।
 
डालो अंदर, जल्दी, वो बेचैनी से बोली। मैंने धीरे-धीरे आगे बढ़ना शुरू किया।  मेरे लंड का सिरा उसकी चुत के अंदर घुस गया।  अंदर का वातावरण गर्म, नम और तंग था।  उसकी चुत की मांसपेशियों ने मेरे लंड को जकड़ लिया।  आआह्ह्ह्ह…

हम दोनों के मुँह से एक साथ आवाज़ निकली।  मैंने अपना पूरा वज़न अपनी बाँहों पर डाला और और अंदर तक सरकने लगा।  पहली बार जब मेरा पूरा लंड उसके अंदर गया तो हम दोनों एक पल के लिए रुक गए।  उसके चेहरे पर दर्द और आनंद का मिला-जुला भाव था।
 
मैंने धीमी रफ़्तार से चोदना शुरू किया।  मेरा लंड बाहर निकलता और फिर धीरे-धीरे अंदर जाता।  हर बार अंदर जाने पर वो कराह उठती।  मैंने उसके एक पैर को अपने कंधे पर रख लिया और अपना एक हाथ उसकी कमर के नीचे रखकर उसकी कमर को थोड़ा ऊपर उठा लिया।  

इस पोज़ीशन में मेरा लंड उसकी चुत में और भी गहराई तक जा रहा था।  आह्ह्ह हाँ… बस ऐसे ही चोदो मुझे… और ज़ोर से…वो चीखने लगी।

मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी।  बिस्तर की चरमराहट, हमारे शरीरों के टकराने की ‘थप-थप’ की आवाज़ें, और बाहर बारिश की तेज़ गड़गड़ाहट – सब मिलकर एक बेहूदा संगीत बन रहा था।  

मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए उसके चेहरे को देख रहा था।  उसने अपनी आँखें कस कर बंद कर रखी थीं और अपने होठों को दबा रही थी।  मेरा पसीना उसके शरीर पर टपक रहा था और मैं बिना रुके लगातार उसे चोद रहा था।
 
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे पलटकर कुत्ते की पोज़ीशन में कर दिया।  वो अपने हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर आ गई।  उसकी कमर का निचला हिस्सा ऊपर उठा हुआ था और उसकी चुत पीछे से पूरी तरह से खुली हुई थी।  

मैंने उसकी कमर पकड़ी और अपने लंड को फिर से उसकी चुत में घुसा दिया।  इस पोज़ीशन में मैं और भी गहराई तक जा पा रहा था।  मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और ज़ोर-ज़ोर से पीछे से धक्के मारने लगा।  

चोदो मुझे… और ज़ोर से… मेरी चुत फाड़ दो…अनीता अब पूरी तरह से बहक चुकी थी।  उसकी चुदाई की आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
 
उसकी ये बातें सुनकर मैं और भी जंगली हो गया।  मैंने उसके कूल्हों को पकड़कर उसे अपनी तरफ़ ज़ोर से खींचा और अपना लंड तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा।  

हर धक्के के साथ उसका शरीर हिल जाता और उसके स्तन झूल जाते।  मैंने अपना एक हाथ उसकी चुत की तरफ़ बढ़ाया और उसकी चूत की ऊपरी नस को रगड़ने लगा।  आआआअह्ह्ह्ह्हह… नहीं… बस… मैं आ रही हूँ… वो चीखी।  

उसने अपनी चुत की मांसपेशियों को ज़ोर से भींचा और उसके पूरे शरीर में एक तेज़ झटका लगा।  मुझे उसकी चुत के अंदर गर्मी की एक लहर सी दौड़ती महसूस हुई।  वो मेरी आँखों के सामने पहली बार चरम सीमा पर पहुँची थी।
 
उसके बाद, मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया।  वो मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी चुत में डालकर काउगर्ल पोज़ीशन में ऊपर-नीचे होने लगी।  मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था और वो मेरे ऊपर सवार थी।  उसके स्तन मेरे चेहरे के ठीक सामने उछल रहे थे और मैं उन्हें बारी-बारी से मुँह में ले रहा था।  

वो बहुत ही कुशलता से अपनी कमर घुमा रही थी।  उसके बैठने और उठने का अंदाज़ बता रहा था कि वो चुदवाने में कितनी माहिर है।  वो एक अनुभवी चुदक्कड़ की तरह मेरे लंड का पूरा मज़ा ले रही थी। अनीता, मैं निकलने वाला हूँ, मैंने साँस फूलने पर कहा।
 
हाँ, निकालो अंदर, मुझे अंदर ही चाहिए, उसने कहा और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी।  उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रखे और ज़ोर-ज़ोर से मुझे चोदने लगी।  उसकी चुत की जकड़न ने मुझे पागल कर रखा था।  मैंने उसकी कमर पकड़ी और अपना लंड तेज़ी से ऊपर की तरफ़ धकेलने लगा।  

आह्ह्ह… आ… और फिर मैंने उसकी चुत के अंदर ही अपना सारा माल छोड़ दिया।  मेरी गर्म धार से उसकी चुत भर गई।  वो मेरे ऊपर ही ढह गई और हम दोनों देर तक ऐसे ही लिपटे रहे।
 
जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो हमने एक-दूसरे की तरफ़ देखा।  ये एक अजीब पल था।  मेरे मुँह से निकला, अनीता, तुम क्या चीज़ हो? 
 
वो हँसी और बोली, बस तुम्हारी हूँ। उसकी बात सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।  मैंने अपना लंड बाहर निकाला और हम दोनों बाथरूम में जाकर साफ हुए।  वापस कमरे में आकर हमने एक-दूसरे को फिर से गले लगाया।
 
राजीव आता होगा, मैंने कहा। हाँ, जल्दी से तैयार हो जाओ, उसने कहा। हमने जल्दी से कपड़े पहने।  मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसे एक आखिरी गहरा चुंबन दिया।  

मेरे जाने से पहले उसने कहा, अगली बार हम ज़्यादा वक़्त के लिए मिलेंगे।  मैंने हाँ में सिर हिलाया।  जब मैं उसके घर से निकला तो बारिश रुक चुकी थी।  गली में पानी भरा था और हवा में ताज़गी थी।  

मेरा मन और शरीर संतुष्ट था, पर दिमाग में एक बवंडर सा चल रहा था।  मेरा वो राज़, जिसे मैं हमेशा छिपाना चाहता था, दिल्ली की उस बरसाती शाम को दोस्त की बहन के साथ सच बन चुका था।

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